गायत्री की २४ शक्तियाँ उनके यंत्र मंत्र सचित्र

Author: Pt. Shriram Sharma Aacharya

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Preface

परम पूज्य गुरुदेव ने जीवनभर भारतीय संस्कृति की जननी आद्यशक्ति गायत्री की साधना की ।। प्रत्यक्ष फलदायी इस साधना के उन्होंने अपने जीवन में परिणाम पाए तथा अगणित साधकों को प्रेरणा देकर उन्हें भी साधना से सिद्धि का मर्म समझाया ।। गायत्री महाशक्ति स्वयं में ब्रह्मविद्या है एवं गायत्री एवं सावित्री का समन्वय है ।। त्रिपदा गायत्री को समस्त विद्याओं की जननी माना जाता है ।। गायत्री को वेदमाता इसीलिए कहा गया है ।। ब्रह्माजी के एक- एक मुख से गायत्री के एक- एक चरण की व्याख्या होकर चार वेदों का प्राकट्य हुआ है ।। इन्हीं वेदों से संसार के समस्त ज्ञान- विज्ञान की विधाएँ जन्मीं ।। बीज के अंदर जैसे वृक्ष का समस्त वैभव समाया होता है, गायत्री मंत्र रूपी एक छोटे से धर्मशास्त्र के अंदर सारे धर्म- अध्यात्म का विस्तार समाया पड़ा है ।।

गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षर स्वयं में शक्ति बीज कहलाते हैं ।। एक - एक अक्षर का विस्तार ही विभिन्न रूपों में धर्मशास्त्रों के विस्तार में हुआ है ।। मनन करने से जो त्राण करें (रक्षा करें) वे मंत्र कहलाते हैं एवं "गय" अर्थात प्राणों की "त्र" अर्थात त्राण- रक्षा करने वाली महाविद्या गायत्री स्वयं है ।। इस प्रकार गायत्री मंत्र मंत्रों में भी विशिष्ट मंत्रों का राजा है ।।

Table of content

1. आद्यशक्ति गायत्री
2. ब्राह्मी
3. वैष्णवी
4. शाम्भवी
5. वेदमाता
6. देवमाता
7. विश्वमाता
8. ऋतम्भरा
9. मंदाकिनी
10. अजपा
11. ऋद्धि
12. सिद्धि
13. सावित्री
14. सरस्वती
15. लक्ष्मी
16. दुर्गा
17. कुण्डलिनी
18. प्राणाग्नि
19. भवानी
20. भुवनेश्वरी
21. अन्नपूर्णा
22. महामाया
23. पयस्विनी
24. त्रिपुरा


Author Pt. Shriram Sharma Aacharya
Publication Yug Nirman Yojana Vistar trust, Mathura
Publisher Yug Nirman Yojana Press, Mathura
Page Length 60
Dimensions 14 X 22 cm
  • 11:10:AM
  • 30 Sep 2020




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