अमृत, पारस और कल्पवृक्ष

Author: Pt. Shriram Sharma Aaachrya

Web ID: 1140

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Preface

मानव प्राणी सुख का अभिलाषी है ।। वह जो कुछ सोचता और करता है, सुख की अभिलाषा उसमें प्रधान रहती है ।। मानसिक विकास के साथ यह सुखाकांक्षा का दायरा भी बढ़ता जाता है ।। मनुष्य का मस्तिष्क अधिक- से जहाँ तक दौड़ सकता था, उसे दौड़ाकर उसने तीन कल्पना की हैं- (१) अमृत (२) पारस (३) कल्पवृक्ष ।।

मृत्यु से पीछा छुड़ाकर मनमानी अवधि तक जीने के लिए अमृत, मनमानी धन- राशि जमा करने के लिए पारस और हर एक इच्छा को तुरंत पूरी हो जाने के लिए कल्पवृक्ष की उसने चाह की है ।। इन तीनों में से किसी का अस्तित्व यद्यपि प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जाता, तो भी इनके अस्तित्व के संबंध में किंवदंतियाँ सुनी और पढ़ी जाती हैं ।।

अमृत, पारस और कल्पवृक्ष जिस रूप में बताए जाते हैं, उस रूप में कहीं हैं या नहीं ?? इसकी इन पंक्तियों के लेखक को कुछ विशेष जानकारी नहीं है, परंतु अपने चिरकालीन अनुभव के आधार पर उसने ऐसे तत्त्वों का अस्तित्व पाया है, जिनको अपनाने से वह इतना ही आनंद, तृप्ति और संतोष प्राप्त कर सकता है, जितना उन तीन वस्तुओं के आधार पर प्राप्त करता ।। सत्य- प्रेम और न्याय यह तीन तत्त्व हैं, जिन्हें भूलोक के अमृत, पारस और कल्पवृक्ष कह सकते हैं ।। इन तीन आध्यात्मिक तत्त्वों का अखण्ड ज्योति सदा से ही प्रचार और प्रसार करती चली आ रही है ।। उस प्रचार का संकलन पुस्तक के रूप में पाठकों के सामने उपस्थित कर रहे हैं ।। आशा है कि यह पुस्तक मानव जाति की सात्विकता को बढ़ाने में सहायक होगी ।।

Table of content

1. अमृत, पारस और कल्पवृक्ष
Author Pt. Shriram Sharma Aaachrya
Publication Yug Nirman Yojana trust, Mathura
Publisher Yug Nirman Yojana Press, Mathura
Page Length 48
Dimensions 12 X 18 cm
  • 05:33:PM
  • 26 Jan 2020




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