प्यार और सहकार भरे परिवार बसे

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

Web ID: 1097

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Preface

मित्रो! संस्कारवान परिवार ही आगे बढ़ते, प्रगति करते और खुशहाल रहते हैं । अत: आपको अपने बच्चों को संस्कारवान बनाना चाहिए था, उन्हें स्नेह देना चाहिए था । आपने कुटुंब बनाया है, तो उसमें आपको संस्कार देना चाहिए था । आपको अपने कुटुंब में रंग-बिरंगे ठाठ-बाट नहीं बनाने चाहिए थे, वरन उसे स्नेह देना चाहिए था । आपने भारी भूल की है, जिसके कारण आज परिवार टूटते चले जा रहे हैं । आपको यह समझना चाहिए कि परिवार की एक ही माँग है-मोहब्बत, स्नेह ।

मित्रो! जब आपका पेट माँगता है कि हमें भूख लगी है, हमें रोटी मिलनी चाहिए तो आप रोटी देते हैं । उसी प्रकार आपको अपने परिवार के लिए रोटी से ज्यादा मोहब्बत, प्यार देना चाहिए । शरीर का भीतरी हिस्सा अपने को चलाने के लिए रोटी माँगता है । बाहरी हिस्सा हमेशा ठंड़क से, गरमी से बचाव चाहता है । उसके लिए कंबल तथा पंखा, कूलर की माँग करता है । उसकी आप पूर्ति करते हैं । परंतु साथियो! एक और चीज है आपके भीतर, उसका नाम है-"आत्मा" । आत्मा-अंतरात्मा की एक ही कसक है और वह एक ही चीज माँगती है । वह क्या है ? वह है मोहब्बत, वह है स्नेह । आपकी बीबी क्या आपके घर में रोटी, कपड़ा के लिए आई है ? क्या उसके घर में इनकी कमी थी ? उसके घर में जब नौकरानी काम करती है, तो यहाँ किसलिए आई है ? कामवासना की पूर्ति के लिए ? नहीं, आपको नहीं मालूम, इसके लिए नहीं आई है ।

Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Publication Yug Nirman Trust, Mathura
Page Length 32
Dimensions 9 X 12 cm
  • 04:30:PM
  • 29 May 2020




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