मनुष्य एक भटका हुआ देवता

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

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Preface

देवियो, भाइयो! ऋषि के मन में एक सवाल उत्पन्न हुआ-कस्मै देवाय हविषा विधेम । हम किस देवता की प्रार्थना करें और किस देवता के लिए हवन करें, यजन करें, प्रार्थना करें ? कौन सा देव है, जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा कर सके । हमको शांति प्रदान कर सके, हमें ऊँचा उठाने में मदद दे सके । किस देवता को प्रणाम करें । मित्रो! बहुत से देवताओं का पूजन करते-करते हम बाज आ गए । हमने शंकर जी की पूजा की, हनुमान जी की पूजा की, गणेश जी की पूजा की और न जाने क्या-क्या चाहा ? लेकिन कोई कामना पूरी न हो सकी । हम एक को छोड्कर के दूसरे पर गए । दूसरे को छोड्कर के तीसरे पर गए । क्या कोई ऐसा देव होना संभव भी है, जो हमारी मनोकामना को पूर्ण करने में समर्थ हो सके ? जो हमको प्रत्यक्ष फल निश्चित रूप से देने में समर्थ हो सके-निश्चित फल, प्रत्यक्ष फल, तत्काल फल । क्या कोई ऐसा भी देवता है, जिसके बारे में यह कहा जा सके कि इनकी पूजा निरर्थक नहीं जा सकती ? कस्मै देवाय हविषा विधेम । ऐसा देव कौन है ?
Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Publication Yug Nirman Trust, Mathura
Page Length 32
Dimensions 9 X 12 cm
  • 08:34:PM
  • 5 Jun 2020




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