विचार क्रांति ही एकमात्र उपचार

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

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Preface

देवियो, भाइयो! मनुष्य के शरीर में दो चीजें हैं-एक उसकी रचना अर्थात काया और दूसरी चेतना । काया का संबंध खाने-पीने से है, सोने-उठने से है और इंद्रिय भोगों से है । पशु का छोटा सा जीवन जिस तरीके से काया के ऊपर टिका रहता है, उसी तरीके से यदि मनुष्य का जीवन भी टिका रहे तो यह मानना चाहिए कि मनुष्य के जीवन का कोई महत्त्व न बन सका और उसके जीवन का कोई उद्देश्य पूरा न हो सका । खाने-पीने और बच्चे पैदा करने के जंजाल में वह फँस गया । यह भी कोई जीवन है क्या ? नहीं, यह कोई जीवन नहीं है । यह बहुत ही घटिया और पशुओं जैसा नारकीय जीवन है ।

मित्रो! मनुष्य के पास जो कुछ भी विशेषता और महत्ता है, जिसके कारण वह स्वयं उन्नति करता जाता है और समाज को ऊँचा उठा ले जाता है वह उसके अंतर की विचारधारा है । जिसको हम चेतना कहते हैं, अंतरात्मा कहते हैं, विचारणा कहते हैं । यही एक चीज है, जो मनुष्य को ऊँचा उठा सकती है और महान बना सकती है । शांति दे सकती है और समाज के लिए उसे उपयोगी बना सकती है । मनुष्य की चेतना, जिसको हम विचारणा कह सकते हैं, किस आदमी का विचार करने का क्रम कैसा है ? बस, असल में वही उसका स्वरूप है ।

Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Publication Yug Nirman Trust, Mathura
Page Length 32
Dimensions 9 X 12 cm
  • 06:05:PM
  • 15 Nov 2019




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