चेतना की शिखर यात्रा भाग-3

Author: Pandit Shriram Sharma Aacharya

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Preface

राष्ट की आजादी के बाद एक बहुत बड़ा वर्ग तो उसका आनन्द लेने में लग गया किन्तु एक महामानव ऐसा था जिसने भारत के सांस्कृतिक आध्यात्मिक उत्कर्ष हेतु अपना सब कुछ नियोजित कर देने का संकल्प लिया। यह महानायक थे श्रीराम शर्मा आचार्य। उनने धर्म को विज्ञान सम्मत बनाकर उसे पुष्ट आधार देने का प्रयास किया। साथ ही युग के नवनिर्माण की योजना बनाकर अगणित देव मानव को उसमें नियोजित कर दिया। चेतना की शिखर यात्रा का यह दूसरा भाग आचार्य श्री 1947 से 1971 तक की मथुरा से चली पर देश भर में फैली संघर्ष यात्रा पर केन्द्रित है।हिमालय अध्यात्म चेतना का ध्रुव केन्द्र है। समस्त ऋषिगण यहीं से विश्वसुधा की व्यवस्था का सूक्ष्म जगत् से नियंत्रण करते हैं। इसी हिमालय को स्थूल रूप में जब देखते हैं, तो यह बहुरंगी-बहुआयामी दिखायी पड़ता है। उसमें भी हिमालय का ह्रदय-उत्तराखण्ड देवतात्मा-देवात्मा हिमालय है। हिमालय की तरह उद्दाम, विराट्-बहुआयामी जीवन रहा है, हमारे कथानायक श्रीराम शर्मा आचार्य का, जो बाद में पं. वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ कहलाये, लाखों ह्रदय के सम्राट बन गए। तभी तक अप्रकाशित कई अविज्ञात विवरण लिये उनकी जीवन यात्रा उज्जवल भविष्य को देखने जन्मी इक्कीसवीं सदी की पीढ़ी को-इसी आस से जी रही मानवजाति को समर्पित है।

Table of content

1. परिवर्तन का सूत्रपात
2. चुनौतियां और मार्ग
3. अदृष्ट का निर्धारण
4. गुरुदेव की वापसी
5. अफ्रीकी देशों में उद्घोष
6. प्राण प्रत्यावर्तन सत्र
7. कुंभ पर्व का रहस्य
8. विक्षोभ के वर्ष
9. युवा धर्म की परख
10. रघुवर के गुन गाओं
11. अनुभव और ऊर्जा का संगम
12. कन्याओं का दैवी दायित्व
13. शत्तिरूपेण संस्थिता
14. अवतार प्रक्रिया का रहस्य
15. राजनीति से हटकर
16. विडत्बना और तथ्य
17. गायत्री योग का प्रवर्तन
18. कुछ अदृश्य पन्ने
19. साधना स्वर्ण जयंती
20. जल उपवास: प्रक्षालन प्रयोग
21. यथार्थ की कसौटी पर विश्वास
22. प्रज्ञावतार के लीला केन्द्र
23. गायत्रीतीर्थ : जहाँ लोग तर जाते हैं
24. सजल श्रद्धा- प्रखर प्रज्ञा
25. सूक्ष्म में प्रवेश
Author Pandit Shriram Sharma Aacharya
Edition 2013
Publication Yug Nirman Yogana, Mathura
ISBN 8182550059
Publisher Yug Nirman Yogana, Mathura
Page Length 464
Dimensions 230mmX145mmX25mm




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