कठिनाइयों की कसौटी पर खरे उतरें

Author: Pt Shriram Sharma Acharya

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Preface

सृष्टि-संचालन के सार्वभौम नियमों के अनुसार जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन होते रहना एक स्वाभाविक बात है । दिन के बाद रात और रात के बाद दिन होता है । वर्षा के बाद शरद और इसके पश्चात ग्रीष्म ऋतु का आगमन भी निश्चय ही होता है । सूर्य, चंद्र एवं अन्य ग्रह भी एक नियमबद्ध गति में चलते हैं । इसी तरह मानव जीवन भी इन सार्वभौम नियमों के अंतर्गत सदैव एकसा नहीं रहता । मनुष्य की इच्छा हो या न हो, जीवन में भी परिवर्तनशील परिस्थितियाँ आती रहती हैं । आज उतार है तो कल चढ़ाव । चढ़े हुए गिरते हैं और गिरे हुए उठते हैं । आज उँगली के इशारे पर चलने वाले अनेक अनुयायी हैं तो कल सुख-दुःख की पूछने वाला एक भी नहीं रहता । रंक कहाने वाला एक दिन धनपति बन जाता है तो धनवान निर्धन बन जाता है । जीवन में इस तरह की परिवर्तनशील परिस्थितियाँ आते-जाते रहना नियतिचक्र का सहज स्वाभाविक नियम है । इनसे बचा नहीं जा सकता, इन्हें टाला नहीं जा सकता ।

एकांगी विचारप्रेरित मनुष्य इस नियति के विधान को नहीं समझ पाता । वह अपनी इच्छा-कामना के अनुकूल परिस्थितियों में ही सुख का अनुभव करता है तो विपरीत परिस्थितियों में दुःखी हो जाता है । अधिकांश व्यक्ति सुख, सुविधा, संपन्नता, लाभ, उन्नति आदि में प्रसन्न और सुखी रहते हैं किंतु दुःख, कठिनाई, हानि आदि में दुःखी और उद्विग्न हो जाते हैं । किंतु यह मनुष्य के एकांगी दृष्टिकोण का परिणाम है और इसी के कारण कठिनाई, मुसीबत, कष्ट आदि शब्दों की रचना हुई ।

Table of content

1. कठिनाइयों की कसौटी से कतराइए मत
2. कसौटी से कतराइए मत
3. सुख ही सुख क्यों ? दुःख क्यों नहीं ??
4. भवितव्यता से भयभीत न हों
5. एकांगी बनकर अपूर्ण न रह जाएँ
6. अपने शत्रु आप न बनें
7. सचाई को जानें और आगे बढे़ं
8. उतार- चढ़ावों से उद्विग्न न हों
9. दुःख करने से लाभ क्या ??
10. धैर्यवान पुरुषसिंह
11. भाग्य को बुरा मत कहिए
12. हारिए मत, जीतने की ही बात सोचिए
13. परिवर्तन के साथ सामंजस्य बिठाना सीखें
Author Pt Shriram Sharma Acharya
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 64
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 05:12:AM
  • 23 Jan 2020




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