प्रतिभा पुरुषार्थ की चेरी

Author: Pt. Shriram sharma acharya

Web ID: 1017

`9 Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

प्रतिभा- पराक्रम, मनोयोग और साहस के सम्मिश्रण से बनती है ।। वह कितने ही सांसारिक क्रियाकुशल, पुरुषार्थपरायण, स्फुर्तिवान और महत्त्वाकांक्षी लोगों में भी पाई जाती है ।। उसे व्यक्तित्व का मूल्य समझने वाले अपनी आदतों को तदनुरूप ढालकर स्वयं भी विकसित कर लेते हैं ।। कुछ में वह जन्मजात भी होती है, जिसका कारण पूर्व संचित संस्कारों की संपदा को ही माना जा सकता है ।। राजनीति, साहित्य, कला, व्यवसाय आदि क्षेत्र में कितने ही प्रतिभाशाली लोग आए दिन दृष्टिगोचर होते रहते हैं ।।

प्रखरता इससे आगे की बात है ।। उसमें अध्यात्म स्तर का पुरुषार्थ- अनुदान जुड़ा होता है ।। वह आदर्शवादी भी होती है और उत्कृष्टता समर्थक उच्चस्तरीय भी ।। प्रखरता और प्रतिभा का अंतर स्पष्ट है ।। प्रतिभा का झुकाव वैभव अर्जित करने के लिए ललकता रहता है और वह आमतौर से भौतिक सफलता- सुविधा के लिए ही प्रयुक्त होती रहती है ।। प्रखरता का रुझान आदर्शों की ओर होता है, वह संपदा नहीं महानता अर्जित करती है ।। उसका उपयोग व्यक्तिगत सुविधा संपादन में तो नगण्य ही होता है किंतु अधिकांश क्षमता सत्प्रवृत्ति संवर्द्धन में लगी रहती है ।। प्राय: लोकमंगल के परमार्थ प्रयोजनों में उसे नियोजित रहते देखा गया है ।।

Table of content

1. प्रखर प्रतिभा का अर्जन मनोयोग व लगन से
2. प्रतिभा पर आयु का सीमा बंधन नहीं
3. हर व्यक्ति मेधावी बन सकता है
4. प्रतिभा निखरती है प्रतिकूलताओं से
5. प्रतिभा पुरुषार्थ की चेरी
6. ओजस्विता, तेजस्विता और मनस्विता का आतंरिक भंडागार

Author Pt. Shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication Yug nirman yojana press
Publisher yug nirman vistar trust
Page Length 48
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 12:37:AM
  • 6 Jun 2020




Write Your Review



Relative Products