सुव्यवस्थित जीवन का मनोविज्ञान

Author: Pt Shriram Sharma Acharya

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Preface

दूसरों की सहायता से अपनी सुविधाएँ बढ़ती हैं और उनके असहयोग एवं आक्रमण से अपनी प्रगति का मार्ग अवरुद्ध होता है- विद्वेषी लोग विपत्ति खड़ी करते हैं और सहयोगी सुखद संभावनाएँ उत्पन्न करते हैं- यह तथ्य सर्वविदित है ।। इसलिए हर किसी की इच्छा यही रहती है कि उसके सहयोगी बढ़ते रहें और विद्वेषी घटते जाएँ ।। इस स्वाभाविक आकांक्षा की पूर्ति का जो सही तरीका है उससे बहुत कम लोग परिचित होते हैं ।। यही बहुत बड़े दुर्भाग्य की बात है ।। अनुभवहीन प्रयास में भटकते हुए पैर कहीं से कहीं जा पहुँचते हैं और भटकाव के कारण उलटे उलझन में फँसते तथा कष्ट सहते हैं ।। संसार का सुस्थिर सनातन शाश्वत नियम यह है कि व्यक्ति का स्तर अपने स्तर की ओर आकर्षित होता है और आकर्षित करता है ।।

Table of content

1.सुव्यवस्थित जीवन का मनोविज्ञान
Author Pt Shriram Sharma Acharya
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 32
Dimensions 9 cm x 12 cm
  • 02:04:PM
  • 6 Jun 2020




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