सुख और प्रगति का आधार आदर्श परिवार

Author: Brahmavarchasva

Web ID: 1003

`15 Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

पारिवारिक जीवनक्रम तप और त्याग से भरा हुआ है ।। गृहस्थी के निर्वाह हेतु किया जाने वाला प्रयत्न किसी तितीक्षा से कम नहीं ।। परिवार का भार वहन करना, सदस्यों की सहकारितापूर्वक सुविधा के साधन जुटाना एक दुस्तर तपस्या है ।। उससे भी अधिक दुस्तर जो तपोवनों में बैठकर की जाती है ।। इस व्यवस्था में ही व्यक्ति अपनी अनेक प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाना सीखता है ।। माँ- बाप स्वयं अपना पेट काटकर भी बच्चों को पढ़ाते हैं, छोटों को आगे बढ़ाते हैं ।। इसी खदान से सुसंस्कारी नागरिक निकलते हैं एवं इस व्यवस्था से ही जन्म लेती हैं- भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर- अतिशय धर्म ।।

यह एक विडम्बना ही है कि बढ़ती आधुनिकता व शहरीकरण की आसुरी लीला ने इस व्यवस्था को हानि पहुँचाने का कुछ सीमा तक प्रयास किया है ।। यही कारण है कि अब यह संस्था विशृंखलित होने लगी है ।। यह आलोक जन- जन तक पहुँचाना जरूरी है कि सहयोग- सहकारिता भरी परिवार व्यवस्था ही सुख- शांति से युक्त समाज का मूल आधार है ।।

Table of content

1. परिवार निर्माण-एक जीवन साधना
2. परिवार निर्माण से अनेक समस्याओं का समाधान
3. सुधार का प्रारंभ स्वयं से करें
4. परिवार निर्माण से ही व्यक्ति और समाज का निर्माण संभव
5. पारिवारिक संगठन टूटने न पाएँ
6. परिवार को सुसंस्कृत बनाने के कुछ सूत्र
7. पारिवारिक सामंजस्य हेतु पंचशील के सिद्धांत
8. पारिवारिक उन्नति हेतु पंचशीलों का पालन
9. परिवार को संपन्न ही नहीं सुसंस्कृत भी बनाएँ
10. पविार में आस्तिकता का वातावरण
11. परिवारों में स्वाध्याय की प्रवृत्ति बढ़े
12. नई और पुरानी पीढ़ी का संघर्ष
13. योग साधना की प्रयोगशाला अपना घर
14. आदर्श परिवार की स्वस्थ परंपराएँ

Author Brahmavarchasva
Edition 2013
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 56
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 06:18:PM
  • 26 May 2020




Write Your Review



Relative Products