गायत्री साधना क्यो ? और कैसे ?

Author: pt Shriram sharma acharya

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Preface

गायत्री परमात्मा की वह इच्छा शक्ति है, जिसके कारण सारी सृष्टि चल रही है । छोटे से परमाणु से लेकर पूरे विश्व-ब्रह्मांड तक व नदी-पर्वतों से लेकर पृथ्वी, चाँद व सूर्य तक सभी उसी की शक्ति के प्रभाव से गतिशील हैं । वृक्ष-वनस्पतियों में जीवन की तरंगें उसी के कारण उठ रही हैं । अन्य प्राणियों में उसका उतना ही अंश मौजूद है, जिससे कि उनका काम आसानी से चल सके । मनुष्य में उसकी हाजिरी सामान्य रूप से मस्तिष्क में बुद्धि के रूप में होती है । अपना जीवन निर्वाह और सुख-सुविधा बढ़ाने का काम वह इसी के सहारे पूरा करता है । असामान्य रूप में यह ऋतंभरा प्रज्ञा अर्थात सद्बुद्धि के रूप में प्रकट होती है । जो उसे सही गलत की समझ देकर जीवन लक्ष्य के रास्ते पर आगे बढ़ाती है । आमतौर पर यह मनुष्य के दिलोदिमाग की गहराई में सोई रहती है । इसको जिस विधि से जगाया जाता है, उसको साधना कहते हैं । इसके जागने पर मनुष्य का संबंध ईश्वरीय शक्ति से जुड़ स्वयं परमात्मा तो मूलरूप में निराकार हैं, सब कुछ तटस्थ भाव से देखते हुए शांत अवस्था में रहते हैं । सृष्टि के प्रारंभ में जब उनकी इच्छा एक से अनेक होने की हुई, तो उनकी यह चाहना व इच्छा एक शक्ति बन गई । इसी के सहारे यह सारी सृष्टि बनकर खड़ी हो गई । सृष्टि को बनाने वाली प्रारंभिक शक्ति होने के कारण इसे आदिशक्ति कहा गया । पूरी विश्व व्यवस्था के पीछे और अंदर जो एक संतुलन और सुव्यवस्था दिख रही है, वह गायत्री शक्ति का ही काम है ।

Table of content

• गायत्री शक्ति क्या है
• गायत्री मंत्र के उच्चारण से दिव्य शक्तियों का जागरण
• सद्गुन बढ़ाने वाला आंतरिक हेरफेर
• समृद्धि और सफलताओं वाली गायत्री
• संकट मोचन गायत्री
• धरती की कामधेनू गायत्री
• अज्ञात अर्थात नासमझी
• हर युग में गायत्री महिमा का गुणगान

Author pt Shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 32
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 02:57:PM
  • 13 Nov 2019




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