सामवेद

Author: pt Shriram sharma acharya

Web ID: 288

`198
`220
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Preface

‘‘वेदानां सामवेदोऽस्मि’’ कहकर गीता उपदेशक ने सामवेद की गरिमा को प्रकट किया है। साथ ही इस उक्ति के रहस्य की एक झलक पाने की ललक हर स्वाध्यायशील के मन में पैदा कर दी है। यों तो वेद के सभी मंत्र अनुभूतिजन्य ज्ञान के उद्घोषक होने के कारण लौकिक एवं आध्यात्मिक रहस्यों से लबालब भरे हैं, फिर सामवेद में ऐसी क्या विशेषता है, जिसके कारण गीता ज्ञान को प्रकट करने वाले ने यह कहा कि ‘वेदों में मैं सामवेद हूँ।’

Author pt Shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 332
Dimensions 19X25.2 cm
  • 06:04:PM
  • 15 Nov 2019




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