साधना पद्धतियों का ज्ञान विज्ञान-4

Author: Brahmavarchasv

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Preface

भारतीय संस्कृति का कोश अनेकानेक रत्नों से भरा पड़ा है। योगदर्शन उनमें से एक है जो व्यक्ति को उच्च से उच्चतर-उच्चतम सोपानों पर चढ़ाने की विधा का प्रशिक्षण देता है। साधना जो योगदर्शन के अन्तर्गत विभिन्न पद्धतियों के माध्यम से सिखाई जाती हैं कोई जादू-चमत्कार नहीं वरन् विशुद्घ विज्ञान है। मानवीसत्ता के कण-कण में दिव्यता भरी पड़ी है जो कि अद्भुत है, अनन्त है। उसी को परमस्तर तक पहुँचा देने के लिए जो प्राप्ति का पुरुषार्थ किया जाता है- आकांक्षा, साहसिकता, सक्रियता और तत्परता जुटायी जाती है, उसी को साधना कहते हैं। साधना का अर्थ अपने आपको को साधना-अपने कर्म को कुशलतापूर्वक संपादित कर लेना तथा विच्छृंखलित, अस्तव्यस्त स्थिति से सुव्यवस्थित, सुरुचिपूर्ण स्थिति में अपने व्यक्तित्व को पहुँचाना।

Table of content

1. वयोग्य: कर्मसु कौशलम्
2. पातंजलि योग का तत्व-दर्शन
3. योगश्चित्तवृत्ति निरोध:
4. यम और नियम
5. अष्टांग योग में आसनों की उपयोगिता

Author Brahmavarchasv
Publication Akhand Jyoti Santahan, Mathura
Publisher Janjagran Press, Mathura
Page Length 418
Dimensions 205X273X25 mm
  • 12:17:PM
  • 26 Aug 2019




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