युगऋषि चिंतन १

Author: Pt. Shriram sharma acharya

Web ID: 1286

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Preface

ऋषि चिंतन के सान्निध्य में परम पूज्य गुरुदेव के मौलिक विचारों का प्रस्तुतीकरण है सद्विचारों के माध्यम से महामानव कैसे किसी समय विशेष में जन समुदाय को एक विशिष्ट लक्ष्य की ओर मोड़ देते हैं इसका परिचय इन छोटे छोटे विचार सार रूपी संदेशों द्वारा मिलता है । अखंड ज्योति पत्रिका के सन १९४० से सन १९६६ तक के प्रकाशित लेखों में से महत्वपूर्ण चिंतनपरक विचारों का संकलन इस ग्रन्थ में किया गया है ।

इस ग्रन्थ के स्वाध्याय से हम अपना, अपने परिवारीजनों का जीवन सफल बनाएं। अपने परिचितों, स्नेहीजनों, रिश्तेदारों एवं अथितियों को सभा सम्मेलनों, विवाह संस्कार, जन्मदिवस किसी पर्व त्यौहार पर भेंट किया जाय, ताकि अपने परिकर में भी समान विचारधारा फैले । हमारा आत्मीय पाठक बंधुओं से निवेदन है कि इस ग्रन्थ की अधिकाधिक प्रतियाँ समाज में फैलाने में अपना हर संभव सहयोग करें ।

Table of content

1. उठो हिम्मत करो
2. आनंद की खोज
3. पहले दो पीछे पाओ
4. उद्देश्य उंचा रखें
5. तुम ईश्वर को पूजते जो या शैतान को
6. आत्मिक तृप्ति का आधार
7. गीता का कर्मयोग
8. कर्म या पाखण्ड
9. आत्मशक्ति का विकास
10. सच्चा धर्मात्मा कौन
11. प्रभु की माया
12. कर्त्तव्यपालन
13. दृष्टिकोण बदलो
14. हृदय-मंदिर के अन्दर संतोष
15. अंतर्मुखी होने पर ही शान्ति
16. असत्य की ओर नहीं सत्य की ओर
17. सत्य का प्रकाश
18. दूसरों पर दया करो
19. सत्संग का महत्व

Author Pt. Shriram sharma acharya
Publication Yug Nirman Vistar Trust, Matura
Publisher Yug Nirman Vistar Trust, Matura
Page Length 222
Dimensions 18 X 12 cm
  • 07:22:PM
  • 16 Dec 2019




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