१०८ उपनिषद्-साधना खण्ड

Author: Pandit Shriram Sharma Aacharya

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Preface

उपनिषद् में उप और नि उपसर्ग हैं । सद् धातु गति के अर्थ में प्रयुक्त होती है। गति शब्द का उपयोग ज्ञान, गमन और प्राप्ति इन तीन संदर्भो में होता है । यहाँ प्राप्ति अर्थ अधिक उपयुक्त है । उप सामीप्येन, नि-नितरां, प्राम्नुवन्ति परं ब्रह्म यया विद्यया सा उपनिषद अर्थात् जिस विद्या के द्वारा परब्रह्म का सामीप्य एवं तादात्म्य प्राप्त किया जाताहै, वह उपनिषद् है ।

Table of content

विषयानुक्रमणिकाक . प्रकाशकीयख . संकेत विवरण
1. अक्षमालिकोपनिषद्
2. अक्ष्युपनिषद्
3. अद्वयतारकोपनिषर्
4. कलिसंतरणोपनिषद्
5. कालाग्निरुद्रोपनिषद्
6. कृष्णोपनिषद्
7. गणपत्युपनिषद्
8. गरुडो़पनिषद्
9. गायत्री रहस्योपनिषद्
10. गोपालपूर्वतापिन्युपनिषद्
11. चतुर्वेदोपनिषद्
12. चाक्षुषोपनिषद्
13. तुलस्युपनिषद
14. त्रिपुरोपनिषद्
15. त्रिशिखिब्रह्मणोपनिषद्
16. दक्षिणामूत्र्युपनिषद
17. देव्युपनिषद
18. ध्यानविन्दूपनिषद्
19. नारायणोपनिषद्
20. नीलरुद्रोपनिषद्
21. नृसिंहपूर्वतापिन्युपनिषद्
22. नृसिंहषटचक्रोपनिषद्
23. पाशुपत ब्राह्मणोपनिषद
24. प्राणाग्निहोत्रोपनिषद
25. बह्वृचोपनिषद्
26. भावनोपनिषद्
27. महोपनिषद्
28. योगकुण्डल्युपनिषद
29. योगचूडामण्युपनिषद्
30. योगराजोपनिषद्
31. राधोपनिषद्
32. रामपूर्वतापिन्युपनिषद्
33. रुद्रहृदयोपनिषद्
34. रुद्राक्षजाबालोपनिषद्
35. रुद्रोपनिषद्
36. लाड्गूलोपनिषद्
37. शरभोपनिषद्
38. सरस्वती रहस्योपनिषद्
39. सावित्र्युपनिषद
40. सीतोपनिषद
41. सूर्योपनिषद्
42. सौभाग्यलक्ष्म्युपनिषद
परिशिष्ट.
1.परिभाषाकोश
2.मन्त्रानुक्रमणिका
3.रेखाचित्र
Author Pandit Shriram Sharma Aacharya
Edition 2010
Publication Yug Nirman Yogana, Mathura
Publisher Yug Nirman Yogana, Mathura
Page Length 360
Dimensions 252mm X191mm X19mm




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