वेदांत दर्शन

Author: Pandit Shriram Sharma Aacharya

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Preface

भारतीय चिन्तन धारा में जिन दर्शनों की परिगणना विद्यमान है, उनमें शीर्ष स्थानीय दर्शन कौन सा है ? ऐसी जिज्ञासा होने पर एक ही नाम उभरता है, वह है - वेदान्त । यह भारतीय दर्शन के मंदिर का जगमगाता स्वर्ण कलश है- दर्शनाका देदीप्यमान सूर्य है । वेदान्त की विषय वस्तु, इसके उद्देश्य, साहित्य और आचार्य परम्परा आदिपर गहन चिन्तन करें, इससे पूर्व आइये, वेदान्त शब्द का अर्थ समझें |

वेदान्त का अर्थ- वेदान्त का अर्थ है- वेद का अन्त या सिद्धान्त । तात्पर्य यह है - वह शास्त्र जिसके लिए उपनिषद् ही प्रमाण है । वेदान्तमें जितनी बातों का उल्लेख है, उन सब का मूल उपनिषद् है । इसलिए वेदान्त शास्त्र के वे ही सिद्धान्त माननीय हैं, जिनके साधक उपनिषद् के वाक्य हैं । इन्हीं उपनिषदों को आधार बनाकर बादरायण मुनि ने ब्रह्मसूत्रों की रचना की ।
Author Pandit Shriram Sharma Aacharya
Edition 2011
Publication Yug Nirman Yogana, Mathura
Publisher Yug Nirman Yogana, Mathura
Page Length 264
Dimensions 187mm X 254mm X 14mm




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