गुरुवर की धरोहर भाग-3

Author: Dr.Pranav Pandya

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Preface

महापुरुषों के अमृत वचन हमारे लिए उनके साथ किये गए सत्संग की पूर्ति कर देते हैं । उनका उपदेश हमारी चित्तशुद्धि करता है एवं हमें क्षुरस्य धारा की तरह अध्यात्म के दुस्तर मार्ग पर चलने का साहस देता है । परम पूज्य गुरुदेव पं० श्रीराम शर्मा आचार्य जी के जीवन की एक सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनने जीवन भर ऐसा लिखा, जिसने लाखों- करोड़ों का मार्गदर्शन किया तथा अपने प्रवचनों में इतना कुछ कहा कि अगणित व्यक्ति जो साहित्य के माध्यम से नहीं जुड़े थे, उनकी अमृतवाणी सुनकर जुड़ गए । इतनी सरल भाषा, इतने सुन्दर जीवन से जुड़े उदाहरण, कथानक एवं कबीर, तुलसी, वाल्मीकि, व्यास की विद्वत्ता का, आद्य शंकर एवं स्वामी विवेकानन्द के कुशाग्र भावसिक्त विचारों का समन्वय और कहीं देखने को नहीं मिलता । प्रस्तुत पुस्तक गायत्री व यज्ञ को जन- जन तक पहुँचाने वाले उसी युगपुरुष की अमृतवाणी का संकलन- सम्पादन है । एक प्रयास अप्रैल १९९५ में हुआ था, जब गुरुवर की धरोहर के भाग एक व दो प्रकाशित हुए थे । इनके माध्यम से आँवलखेड़ा पूर्णाहुति की पूर्ववेला में लाखों साधकों- परिजनों ने उनके विचारों को उनकी लिपिबद्ध प्रकाशित वाणी के रूप में पढ़ा । इसी के तुरंत बाद वाड्मय के ७० खण्डों का प्रकाशन हुआ । इनमें एक खण्ड अड़सठवें (६८ वें) खण्ड के रूप में पूज्यवर की अमृतवाणी प्रकाशित हुई । इसमें भी प्रवचनों का संकलन है ।

Table of content

1. आपका विवाह हम भगवान् से कराना चाहते हैं
2. विवेक की साधना और सिद्धि
3. धर्मतंत्र का परिष्कार अत्यंत अनिवार्य
4. अध्यात्म के सही मर्म को समझें
5. त्याग बलिदान की संस्कृति देवसंस्कृति
6. हमारा कुटुम्ब तब और अब
7. स्वयं को ऊँचा उठायें व्यक्तित्ववान बनें
8. जीवंत विभूतियों से भावभरी अपेक्षाएँ
9. धर्मग्रंथ हमें क्या शिक्षण देते हैं, यह जानें
10.फिजी बदल देती है अवतार की आँधी
Author Dr.Pranav Pandya
Edition 2014
Publication Shri Ved Mata Gayatri Trust
Publisher Shri Vedmata Gayatri Trust
Page Length 190
Dimensions 220mmX141mmX10mm




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